प्रतिबिम्बसेवाधर्मः। निरोधकक्षधर्मस्य (१ फाल्गु) अनन्तरं अत्र प्रतिबिम्बसेवा: प्रतिबिम्बसेवाधर्मः विलंम्बसीमा उत्कर्षः। प्रतिबिम्बसेवाधर्मः।
English (minimizable)
After bulkheads (1 Feb), this post covers mirror services: read replicas, lag budgets, promote and demote and honesty about which read is fresh.
पूर्ण-शीर्षकम् / Full title
प्रतिबिम्बसेवाधर्मः: A Metrical Codification of Mirror-Service Dharma (with English glosses)
English · overview and topics (minimizable)
What this post is about
A replica is a mirror not a second sun. Serve reads with a lag vow; promote only when the glass is true.
Topics
- Why replica
- Lag budget
- Read routing
- Stale label
- Promote
- Demote heal
- Write primary only
- Lag page
- Not dual primary
- Five limbs
- Close
- Seal
Sanskrit title
प्रतिबिम्बसेवाधर्मः = dharma of the mirror service.
English
Minimizable; Sanskrit-first.
परम्परा-सन्धिः / Series links
| पूर्वं / Prior | अत्र / Adds | न पुनः / Does not repeat |
|---|---|---|
| निरोधकक्षधर्मः (१ फाल्गु) | blast walls | not mirrors |
| पथछायाधर्मः (२३ जन) | shadow traffic | cousin shape |
| अत्र | read replica service | - |
ग्राह्य-त्याज्य-विवेकः / Keep and avoid
ग्राह्यम् / Keep
१. publish max lag SLO: lag
२. route sticky when freshness needed: route
३. label stale reads to clients: label
४. promote only after catch-up: promote
५. never two writers without fence: write
त्याज्यम् / Avoid
- Read any replica ignore lag
- Silent promote on primary death
- App writes to replicas
- No lag alerts
अध्याय-योजना / Chapter plan
| प्रकरणम् | विषयः | छन्दः | श्लोकाः |
|---|---|---|---|
| १ | मङ्गलं बीजं च / Opening | अनुष्टुभ् | २ |
| २ | मूलतत्त्वानि / Core | अनुष्टुभ् | २ |
| ३ | मुख्यविधिः / Method | उपजाति | १ |
| ४ | रक्षा · विधिः / Guards | अनुष्टुभ् | २ |
| ५ | विवेक · सीमा / Judgment | अनुष्टुभ् | २ |
| ६ | पूर्वसन्धिः / Series links | उपजाति | १ |
| ७ | उपसंहारः / Close | अनुष्टुभ् | २ |
पारिभाषिक-कोशः / Glossary
| Modern English | संस्कृतम् | Note |
|---|---|---|
| read replica | पठनप्रतिबिम्बम् | read mirror |
| lag budget | विलंम्बसीमा | max delay vow |
| promote | उत्कर्षः | raise to primary |
| demote | अपकर्षः | step down |
| stale read | जीर्णपठनम् | old mirror read |
श्लोकः १ (अनुष्टुभ्)
अव्रते पठने मिथ्यासत्यम् हि नित्यम् ॥१॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
प्रतिबिम्बं दर्पणं न द्वितीयसूर्यः तस्माद् विलंम्बं ।
अव्रते पठने मिथ्यासत्यम् हि नित्यम् ॥१॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| प्रतिबिम्बं | प्रतिबिम्बं |
| दर्पणं | दर्पणं |
| न | न |
| द्वितीयसूर्यः | द्वितीयसूर्यः |
| तस्माद् | तस्माद् |
| विलंम्बं | विलंम्बं |
| अव्रते | अव्रते |
| पठने | पठने |
| मिथ्यासत्यम् | मिथ्यासत्यम् |
| हि | हि |
| नित्यम् | नित्यम् |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
A replica is a mirror not a second sun; vow the lag.
Context / topic
why
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः २ (अनुष्टुभ्)
गुप्ते विलम्बे विश्वासो नश्यति नित्यम् ॥२॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
अधिकतमविलंम्बं स्फुटं लिख मा गुप्तम् ।
गुप्ते विलम्बे विश्वासो नश्यति नित्यम् ॥२॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| अधिकतमविलंम्बं | अधिकतमविलंम्बं |
| स्फुटं | स्फुटं |
| लिख | लिख |
| मा | मा |
| गुप्तम् | गुप्तम् |
| गुप्ते | गुप्ते |
| विलम्बे | विलम्बे |
| विश्वासो | विश्वासो |
| नश्यति | नश्यति |
| नित्यम् | नित्यम् |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Publish max lag SLO; secret lag kills trust.
Context / topic
lag
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ३ (उपजाति)
सामान्ये बिम्बे गच्छ हि सम्यक् ।
मार्गं लिख स्पष्टम् सदा सम्यक् ।
एवं मार्गधर्मः सदा सम्यक् ॥३॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
नूतनपठने मूले गच्छ हि ।
सामान्ये बिम्बे गच्छ हि सम्यक् ।
मार्गं लिख स्पष्टम् सदा सम्यक् ।
एवं मार्गधर्मः सदा सम्यक् ॥३॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| नूतनपठने | नूतनपठने |
| मूले | मूले |
| गच्छ | गच्छ |
| हि | हि |
| सामान्ये | सामान्ये |
| बिम्बे | बिम्बे |
| सम्यक् | सम्यक् |
| मार्गं | मार्गं |
| लिख | लिख |
| स्पष्टम् | स्पष्टम् |
| सदा | सदा |
| एवं | एवं |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
English sense
Fresh reads to primary; normal to mirrors; write the map.
Context / topic
route
वृत्तमिति: एकादशाक्षराः पादाः।
श्लोकः ४ (अनुष्टुभ्)
छलने सन्धिर्भिद्यते पथि हि नित्यम् ॥४॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
जीर्णपठनं ग्राहकं वद मा छलय ।
छलने सन्धिर्भिद्यते पथि हि नित्यम् ॥४॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| जीर्णपठनं | जीर्णपठनं |
| ग्राहकं | ग्राहकं |
| वद | वद |
| मा | मा |
| छलय | छलय |
| छलने | छलने |
| सन्धिर्भिद्यते | सन्धिर्भिद्यते |
| पथि | पथि |
| हि | हि |
| नित्यम् | नित्यम् |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Label stale reads to clients; hiding staleness breaks the contract.
Context / topic
label
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ५ (अनुष्टुभ्)
अग्रहणे उत्कर्षे द्विसत्यं जायते हि ॥५॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
उत्कर्षं ग्रहणे एव कुरु मा सहसा ।
अग्रहणे उत्कर्षे द्विसत्यं जायते हि ॥५॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| उत्कर्षं | उत्कर्षं |
| ग्रहणे | ग्रहणे |
| एव | एव |
| कुरु | कुरु |
| मा | मा |
| सहसा | सहसा |
| अग्रहणे | अग्रहणे |
| उत्कर्षे | उत्कर्षे |
| द्विसत्यं | द्विसत्यं |
| जायते | जायते |
| हि | हि |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Promote only after catch-up; early promote is dual truth.
Context / topic
promote
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ६ (अनुष्टुभ्)
अरुग्णे अपकर्षे व्यर्थं युद्धम् एव ॥६॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
अपकर्षं रुग्णे कुरु पश्चात् शोधय पथि सदा ।
अरुग्णे अपकर्षे व्यर्थं युद्धम् एव ॥६॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| अपकर्षं | अपकर्षं |
| रुग्णे | रुग्णे |
| कुरु | कुरु |
| पश्चात् | पश्चात् |
| शोधय | शोधय |
| पथि | पथि |
| सदा | सदा |
| अरुग्णे | अरुग्णे |
| अपकर्षे | अपकर्षे |
| व्यर्थं | व्यर्थं |
| युद्धम् | युद्धम् |
| एव | एव |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Demote the sick then heal; demoting the healthy is empty war.
Context / topic
demote
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ७ (अनुष्टुभ्)
बिम्बे लेखे कोशो द्विधा पतति नित्यम् ॥७॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
लेखनं मूले एव बध्नीहि बिम्बे मा लिख ।
बिम्बे लेखे कोशो द्विधा पतति नित्यम् ॥७॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| लेखनं | लेखनं |
| मूले | मूले |
| एव | एव |
| बध्नीहि | बध्नीहि |
| बिम्बे | बिम्बे |
| मा | मा |
| लिख | लिख |
| लेखे | लेखे |
| कोशो | कोशो |
| द्विधा | द्विधा |
| पतति | पतति |
| नित्यम् | नित्यम् |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Writes only on primary; writing the mirror splits the store.
Context / topic
write
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ८ (अनुष्टुभ्)
मौनविलम्बे अग्निर्वर्धते पथि सदा ॥८॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
विलंम्बातिक्रमे शब्दं देहि मौनं मा हि ।
मौनविलम्बे अग्निर्वर्धते पथि सदा ॥८॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| विलंम्बातिक्रमे | विलंम्बातिक्रमे |
| शब्दं | शब्दं |
| देहि | देहि |
| मौनं | मौनं |
| मा | मा |
| हि | हि |
| मौनविलम्बे | मौनविलम्बे |
| अग्निर्वर्धते | अग्निर्वर्धते |
| पथि | पथि |
| सदा | सदा |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Page when lag breaks budget; silence grows fire.
Context / topic
page
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ९ (अनुष्टुभ्)
एकमूलं पर्याप्तं पथि सदा नित्यम् ॥९॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
द्विनेतृबिम्बं न धर्मः पथि कदापि हि ।
एकमूलं पर्याप्तं पथि सदा नित्यम् ॥९॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| द्विनेतृबिम्बं | द्विनेतृबिम्बं |
| न | न |
| धर्मः | धर्मः |
| पथि | पथि |
| कदापि | कदापि |
| हि | हि |
| एकमूलं | एकमूलं |
| पर्याप्तं | पर्याप्तं |
| सदा | सदा |
| नित्यम् | नित्यम् |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Dual-primary mirrors are not dharma; one root is enough.
Context / topic
not dual
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः १० (उपजाति)
उत्कर्षं अपकर्षं लेखम् सदा ।
शब्दं द्वयविवेकम् हि सम्यक् ।
पञ्चाङ्गं प्रतिबिम्बसेवा सदा ॥१०॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
विलंम्बं मार्गं जीर्णम् हि सम्यक् ।
उत्कर्षं अपकर्षं लेखम् सदा ।
शब्दं द्वयविवेकम् हि सम्यक् ।
पञ्चाङ्गं प्रतिबिम्बसेवा सदा ॥१०॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| विलंम्बं | विलंम्बं |
| मार्गं | मार्गं |
| जीर्णम् | जीर्णम् |
| हि | हि |
| सम्यक् | सम्यक् |
| उत्कर्षं | उत्कर्षं |
| अपकर्षं | अपकर्षं |
| लेखम् | लेखम् |
| सदा | सदा |
| शब्दं | शब्दं |
| द्वयविवेकम् | द्वयविवेकम् |
| पञ्चाङ्गं | पञ्चाङ्गं |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
English sense
Five limbs of mirror-service dharma.
Context / topic
five
वृत्तमिति: एकादशाक्षराः पादाः।
श्लोकः ११ (अनुष्टुभ्)
मापितपठनं कर्मयोग्यं तन्त्रधर्मः स उच्यते ॥११॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
इति बिम्बसारः विलंम्बव्रतयुक्तः हि ।
मापितपठनं कर्मयोग्यं तन्त्रधर्मः स उच्यते ॥११॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| इति | इति |
| बिम्बसारः | बिम्बसारः |
| विलंम्बव्रतयुक्तः | विलंम्बव्रतयुक्तः |
| हि | हि |
| मापितपठनं | मापितपठनं |
| कर्मयोग्यं | कर्मयोग्यं |
| तन्त्रधर्मः | तन्त्रधर्मः |
| स | स |
| उच्यते | उच्यते |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Closing: operable replicas under lag-vow law.
Context / topic
close
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः १२ (अनुष्टुभ्)
द्विनेतारं मा बिम्बधर्मः स उच्यते पथि ॥१२॥
पदच्छेदः · Word-for-word · English (minimizable)
पदच्छेदः
विलंम्बं बध्नीहि जीर्णं वद उत्कर्षं तोलय लेखं ।
द्विनेतारं मा बिम्बधर्मः स उच्यते पथि ॥१२॥
Word-for-word
| संस्कृतपदम् | Word-for-word English |
|---|---|
| विलंम्बं | विलंम्बं |
| बध्नीहि | बध्नीहि |
| जीर्णं | जीर्णं |
| वद | वद |
| उत्कर्षं | उत्कर्षं |
| तोलय | तोलय |
| लेखं | लेखं |
| द्विनेतारं | द्विनेतारं |
| मा | मा |
| बिम्बधर्मः | बिम्बधर्मः |
| स | स |
| उच्यते | उच्यते |
Gloss table
| पदम् | अर्थः / sense |
|---|---|
| धर्मः | dharma |
| मितम् | measured |
English sense
Bound lag, label stale, careful promote, write primary, never dual king.
Context / topic
seal
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकसूची / Verse index
१. बिम्बं योजय
२. विलंम्बं बध्नीहि
३. मार्गं विविच्य
४. जीर्णं वद
५. उत्कर्षं तोलय
६. अपकर्षं कुरु
७. लेखं मूले
८. शब्दं देहि
९. पञ्चाङ्गं स्मर
१०. द्विनेतारं मा
११. सत्यं बिम्बं
१२. धर्मं धारय
सन्दर्भाः / References
- Replica lag ops
- Failover promote
- Prior: bulkhead 1 Feb, shadow 23 Jan