सहमतिलेखः। गोपनीयतालेखे (११ जुलै) किं न लेख्यम्। अत्र कदा कस्मै किमर्थम् सहमतिः बद्धा। लेखः, प्रयोजनबन्धः, अपाकरणम्, प्रमाणम्। न बन्धनमात्रम्; स्वेच्छास्मृतिः।
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English title
सहमतिलेखः: A Metrical Codification of Consent Records and Withdrawal
Context and topics
This verse treatise is part of the 2026 Sanskrit systems series (reader format). Primary topics: privacy, consent, gdpr and compliance.
How to read
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Note
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पूर्ण-शीर्षकम्
सहमतिलेखः: A Metrical Codification of Consent Records and Withdrawal
परम्परा-सन्धिः
| पूर्वं | अत्र किम् उपचीयते | किं न पुनरुच्यते |
|---|---|---|
| गोपनीयतालेखः (११ जुलै) | what not to log | redaction recipes |
| परिवर्तननियन्त्रणम् (१२ जुलै) | change risk | freeze rites |
| इदं शास्त्रम् | consent capture, purpose, withdraw, evidence | - |
ग्राह्य-त्याज्य-विवेकः
ग्राह्यम्
१. सहमतिलेखः: timestamped grant with subject and purpose
२. प्रयोजनबन्धः: use only for stated purpose
३. स्वेच्छा: freely given informed specific
४. अपाकरणम्: withdrawal path as easy as grant
५. प्रमाणम्: auditable proof of grant/withdraw
६. धारणसीमा: retain only while needed
७. संस्करणम्: policy text version bound to record
त्याज्यम्
- vendor CMP product names as eternal law
- burying withdraw behind dark patterns
- treating silence as consent forever
अध्याय-योजना
| प्रकरणम् | विषयः | छन्दः | श्लोकाः |
|---|---|---|---|
| १ | मङ्गलं बीजं च | अनुष्टुभ् | २ |
| २ | मूलतत्त्वानि | अनुष्टुभ् | २ |
| ३ | मुख्यविधिः | उपजाति | १ |
| ४ | रक्षा · अभिलेखः | अनुष्टुभ् | २ |
| ५ | विवेक · सीमा | अनुष्टुभ् | २ |
| ६ | पूर्वसन्धिः | उपजाति | १ |
| ७ | उपसंहारः | अनुष्टुभ् | २ |
पारिभाषिक-कोशः
| आधुनिकम् | संस्कृतम् | टिप्पणी |
|---|---|---|
| consent | सहमतिः / अनुज्ञा | |
| purpose limitation | प्रयोजनबन्धः | |
| withdrawal | अपाकरणम् / निरसनम् | |
| data subject | विषयिन् / व्यक्तिः | |
| lawful basis | धर्ममूलम् | |
| record of processing | संसाधनलेखः | |
| retention | धारणकालः | |
| proof / evidence | प्रमाणम् / साक्ष्यम् | |
| versioned notice | सूचनासंस्करणम् | |
| dark pattern | तमोरीतिः | hostile UX |
सहमतिचक्रम्
| अवस्था | कर्म |
|---|---|
| याचना | clear notice + purpose |
| ग्रहणम् | record grant |
| उपयोगः | purpose-bound only |
| अपाकरणम् | stop + propagate |
| धारणान्तः | delete or anonymize |
श्लोकः १ (अनुष्टुभ्)
स्मृतौ सत्यं भवेद् धर्मो विषयिणां हि रक्षणे ॥१॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
बिना लेखेन सहमतिः मिथ्या बन्धनवत् स्थिता ।
स्मृतौ सत्यं भवेत् धर्मः विषयिणां हि रक्षणे ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| बिना लेखेन | without a record |
| मिथ्या | not reliable consent |
| स्मृतौ सत्यम् | truth in durable memory |
| विषयिणां रक्षणे | protecting the subject |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः २ (अनुष्टुभ्)
स्वेच्छया ज्ञात्वा स्पष्टं प्रयोजनं तु गृह्यताम् ॥२॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
न बलात् अनुज्ञा कार्या न च मौनेन कल्पिता ।
स्वेच्छया ज्ञात्वा स्पष्टं प्रयोजनं तु गृह्यताम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| न बलात् | not coerced |
| न मौनेन | silence is not grant |
| स्वेच्छया ज्ञात्वा | freely and informed |
| स्पष्टं प्रयोजनम् | specific purpose |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ३ (अनुष्टुभ्)
अन्यार्थे नयने दोषो विश्वासभङ्ग उच्यते ॥३॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
प्रयोजनं यत् उक्तं स्यात् तेन एव पथे चालयेत् ।
अन्यार्थे नयने दोषः विश्वासभङ्गः उच्यते ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| प्रयोजनबन्धः | purpose limitation |
| अन्यार्थे नयने | secondary use without basis |
| विश्वासभङ्गः | breach of trust |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ४ (अनुष्टुभ्)
पुरातनं वाक्यं मास्तु नवं विना पुनर्ग्रहम् ॥४॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
सूचनायाः संस्करणं लेखे बद्धं भवेत् ध्रुवम् ।
पुरातनं वाक्यं मास्तु नवं विना पुनर्ग्रहम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| संस्करणम् | notice version |
| लेखे बद्धम् | bound on the record |
| पुनर्ग्रहम् | re-consent when material change |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ५ (उपजाति)
प्रयोजनं मार्गश्च साक्ष्यम् ।
एतैर्विना न विश्वासार्हं
सहमतेर् जगति प्रमाणम् ॥५॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
लेखे तिथिः कर्ता विषयी प्रयोजनं मार्गः च साक्ष्यम् ।
एतैः विना न विश्वासार्हं सहमतेः जगति प्रमाणम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| तिथिः | when |
| कर्ता | who captured |
| विषयी | whose data |
| मार्गः | channel/UI path |
| साक्ष्यम् | evidence blob/hash |
पञ्चाङ्गम्: time actor subject purpose channel proof.
वृत्तमिति: एकादशाक्षराः पादाः।
श्लोकः ६ (अनुष्टुभ्)
गूढपथे निरसनं तु तमोरीतिः स उच्यते ॥६॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
अपाकरणं सुलभं स्यात् यथा ग्रहणम् आसीत् ।
गूढपथे निरसनं तु तमोरीतिः सः उच्यते ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| अपाकरणम् | withdrawal |
| सुलभम् | as easy as opt-in |
| तमोरीतिः | dark pattern |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ७ (अनुष्टुभ्)
एकस्मिन् द्वारे मौनं स्यान्न तु सर्वत्र रक्षणम् ॥७॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
निरस्ते सति प्रवाहं स्तम्भयेत् सर्वमार्गके ।
एकस्मिन् द्वारे मौनं स्यात् न तु सर्वत्र रक्षणम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| स्तम्भयेत् सर्वमार्गके | propagate stop across processors |
| एकस्मिन् द्वारे | stopping only one UI |
| न सर्वत्र | insufficient |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ८ (अनुष्टुभ्)
अनन्तकोशो नो धर्मो विषयिणां दुःखदः ॥८॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
धारणकालः मितः स्यात् उद्देश्ये समापिते ।
अनन्तकोशः नो धर्मः विषयिणां दुःखदः ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| धारणकालः | retention window |
| उद्देश्ये समापिते | when purpose ends |
| अनन्तकोशः | forever archive |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः ९ (अनुष्टुभ्)
विवादे सत्यम् आदद्याद् न तु वाचा केवलम् ॥९॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
प्रमाणं पठ्यं स्यात् लेखात् अंकेन कालयुतेन च ।
विवादे सत्यम् आदद्यात् न तु वाचा केवलम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| अङ्केन कालयुतेन | machine-readable timestamped |
| विवादे | in dispute/audit |
| न वाचा केवलम् | not oral memory alone |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः १० (उपजाति)
सहमतिरेखा पृथग् ध्रियताम् ।
मिश्रणे नश्यति प्रमाणं
द्वयं रक्षेत् पृथग्धर्मतः ॥१०॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
गोप्यलेखे यत् वर्ज्यं तत्र सहमतिरेखा पृथक् ध्रियताम् ।
मिश्रणे नश्यति प्रमाणं द्वयं रक्षेत् पृथक् धर्मतः ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| गोप्यलेखे वर्ज्यम् | PII redaction in logs |
| सहमतिरेखा | consent ledger line |
| पृथक् | separate store/path |
सन्धिः: privacy logging avoids sensitive bodies; consent store keeps the grant proof.
वृत्तमिति: एकादशाक्षराः पादाः।
श्लोकः ११ (अनुष्टुभ्)
एभिः सहमतिशास्त्रं स्याद् विश्वाससमन्वितम् ॥११॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
लेखः प्रयोजनं निरसनं प्रमाणं पञ्चमं बलम् ।
एभिः सहमतिशास्त्रं स्यात् विश्वास समन्वितम् ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| पञ्चमं बलम् | fifth: versioned notice |
| विश्वाससमन्वितम् | trust-aligned |
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकः १२ (अनुष्टुभ्)
मितं सत्यं क्रियायोग्यं तन्त्रधर्मः स उच्यते ॥१२॥
पदच्छेदः · शब्दार्थः · व्युत्पत्तिः
पदच्छेदः
इति सहमतिलेखसारः अयम् स्वेच्छास्मृति समन्वितः ।
मितं सत्यं क्रियायोग्यं तन्त्रधर्मः सः उच्यते ॥
| पदम् | अर्थः |
|---|---|
| स्वेच्छास्मृतिः | memory of free choice |
| तन्त्रधर्मः | platform dharma |
उपसंहारन्यायः: गोप्यता किं गोप्यम्; सहमतिः किमर्थं बद्धम्।
वृत्तमिति: ८-८-८-८।
श्लोकसूची
१. बिना लेखेन मिथ्या
२. स्वेच्छा ज्ञात्वा
३. प्रयोजनबन्धः
४. सूचनासंस्करणम्
५. पञ्चाङ्गप्रमाणम्
६. सुलभापाकरणम्
७. सर्वमार्गस्तम्भः
८. मितधारणम्
९. पठ्यप्रमाणम्
१०. गोप्य-सहमतिभेदः
११. पञ्चाङ्गसारः
१२. स्वेच्छास्मृतिधर्मः
सन्दर्भाः
- Prior: गोपनीयतालेखः (2026-07-11), परिवर्तननियन्त्रणम् (2026-07-12).
- Domain: consent records purpose limitation withdrawal evidence.
- Style: no em dash; no Oxford comma in English clauses.